दो पैन कार्ड मामले में आज़म ख़ान व उनके बेटे को सात साल की सज़ा…
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और लंबे समय तक यूपी की मुस्लिम राजनीति का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले आज़म ख़ान एवं उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने दो पैन कार्ड रखने के मामले में सात–सात साल की सज़ा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 50–50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब आज़म ख़ान 56 दिन पहले ही सीतापुर जेल से बाहर आए थे, जबकि अब्दुल्ला आज़म भी नौ महीने पहले रिहा हुए थे।
सज़ा के बाद आज़म ख़ान की राजनीतिक सक्रियता और चुनावी भूमिका पर पहले से लगे प्रतिबंध और कड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश, विशेषकर रामपुर और रोहिलखंड क्षेत्र में दशकों तक प्रभावशाली रहे आज़म ख़ान की अनुपस्थिति विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आज़म ख़ान के बाहर होने से पश्चिमी यूपी और रोहिलखंड में मुस्लिम नेतृत्व का शून्य और गहरा सकता है। इससे सपा के परंपरागत ‘एम-वाई’ समीकरण पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। पार्टी को नए मुस्लिम चेहरों को आगे लाने की मजबूरी होगी, वहीं एआईएमआईएम समेत अन्य छोटे मुस्लिम दलों के लिए क्षेत्र में मजबूत होने का अवसर पैदा होगा।
इसे भाजपा के लिए अनुकूल परिस्थितियों के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी इस कार्रवाई को “कानून का राज” और “भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती” के रूप में जनता के बीच पेश कर सकती है, जिससे रामपुर–बरेली–मुरादाबाद बेल्ट में उसकी पकड़ और मजबूत होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
फैसेले का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। भाजपा इसे कानून की समानता का उदाहरण बताएगी, जबकि विपक्ष इसे चुनिंदा नेताओं पर कार्रवाई का मामला बनाकर मुद्दा उठा सकता है। कुल मिलाकर, दो पैन कार्ड मामले में मिली सज़ा ने न केवल आज़म ख़ान और उनके पुत्र के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में नए समीकरणों और संभावित बदलावों के संकेत भी दे दिए हैं।
रिपोर्ट…. ZFM TIMES




