अखिलेश का संदेश: संपूर्ण क्रांति और सत्ता लक्ष्य….
लखनऊ। 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर लखनऊ में सियासी हलचल तेज रही। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जेपी इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) स्थित प्रतिमा तक पहुँचने से प्रशासन ने रोक दिया। भारी पुलिस बल और डबल-लेयर बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि वह प्रतिमा पर माल्यार्पण न कर पाएं। रोके जाने के बाद, अखिलेश ने सपा कार्यालय पर ही जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि दी और वहां कार्यकर्ताओं से सम्बोधन किया।
श्रद्धांजलि समारोह और संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने निम्न बिंदु प्रमुख रूप से रखे: उन्होंने कहा कि “हम उनकी संपूर्ण क्रांति को पूर्ण करने का संकल्प उठाते हैं” और यह कि जिस ‘सामाजिक न्याय के राज’ और ‘पीडीए समाज’ के सम्मान एवं उत्थान के लिए वे प्रतिबद्ध हैं, वह संपूर्ण क्रांति का पर्याय बनना चाहिए। उन्होंने यह घोषणा की कि 2027 में सत्ता में आकर, जिस जेपी स्मारक को अधूरा छोड़ दिया गया है — उसे विश्वस्तरीय रूप देना उनकी प्राथमिकता होगी।
साथ ही उन्होंने एक वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया कि देश की आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को वो लोग बाधित करते हैं जो कभी अंग्रेजों की मुखबिरी करते थे।
अखिलेश ने सोशल मीडिया पर जयप्रकाश नारायण के कथन को उद्धृत किया — “संपूर्ण क्रांति से मेरा तात्पर्य समाज के सबसे अधिक दबे-कुचले व्यक्ति को सत्ता के शिखर पर देखना है.
छात्र सभा ने किया माल्यार्पण, पुलिस की पाबंदी तोड़ी
चूंकि प्रशासन ने JPNIC परिसर को सख्त सुरक्षा घेरे में रखा था, वहीं सपा छात्र सभा के दो नेताओं — विनीत खुसवाहा और अमर यादव — ने रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए परिसर में प्रवेश कर जेपी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। बाद में वे सुरक्षित बाहर निकले। प्रशासन और पुलिस ने इस घटना पर अभी तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है कि किस तरह ये प्रवेश संभव हो पाया.
राजनीति, प्रतीकवाद और चुनावी संकेत
पिछले वर्ष भी इसी मुद्दे को लेकर सपा और योगी सरकार के बीच संघर्ष देखा गया था, जब अखिलेश को प्रतिमा तक पहुंचने से रोका गया था। इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था और रोकथाम और अधिक सख्त दिखी। इस घटना में प्रतीकवाद की भूमिका अहम है: जेपी और ‘संपूर्ण क्रांति’ जैसे शब्दों को वर्तमान राजनीतिक संघर्ष के आयाम में उपयोग किया गया, ताकि सपा यह संदेश दे सके कि वह वादे और विचारधारा के पक्ष में खड़ी है।
2027 की विधानसभा चुनावों का स्पष्ट लक्ष्य सामने है, और इस तरह के घटनाक्रम सपा को अपने पक्ष में राजनीतिक ऊर्जा बनाने का अवसर देते हैं।
प्रशासन की रोक और सुरक्षा कवायद यह संकेत देती है कि सरकार इस तरह की राजनीतिक सक्रियता पर नियंत्रण रखना चाहती है।




