वि.वि. में “प्राचीन ज्ञान से जलवायु समाधान तक” विषय पर सेमिनार का आयोजन……
आजमगढ़।महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय परिसर में स्थित शैक्षिक भवन एक के अंग्रेजी विभाग द्वारा दीक्षोत्सव के तहत “प्राचीन ज्ञान से जलवायु समाधान तक: भारतीय ज्ञान परंपरा और पर्यावरणीय समाधान” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का बृहद आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार सिंह ने बताया कि अपने उद्घाटन भाषण में कुलपति प्रो. संजीव कुमार जी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System – IKS) में प्रकृति के संरक्षण, सतत विकास और पर्यावरण-संतुलन के अनेक सूत्र निहित हैं। आज के समय में जब जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन गया है, तब इन परंपराओं को समझना और उन्हें आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य वक्ता डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में वृक्षारोपण, जल-संरक्षण, जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि यदि हम इन विचारों को व्यवहार में लाएँ तो जलवायु संकट का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रो. शशांक शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि जलवायु संकट केवल तकनीकी समाधान से नहीं सुलझेगा। हमें अपने प्राचीन भारतीय विचारों से सीख लेकर जीवनशैली में बदलाव करना होगा। जल बचाना, कचरे को कम करना और प्रकृति के साथ संतुलन बनाना अब हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक समिति की संयोजक डॉ. ऋतंभरा दुबे ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि ऐसे सेमिनार युवाओं को पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करते हैं और भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता को पुनः स्थापित करते हैं। मंच संचालन त्रिशिका श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में दीपिका अग्रवाल, मारुति तिवारी, शांभवी तिवारी एवं विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण गैर शिक्षक कर्मचारी एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।




