शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध प्रदर्शन….
महराजगंज (आजमगढ़)। टीईटी की अनिवार्यता को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से स्पष्ट निर्णय न आने पर परिषदीय शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में रविवार को दोपहर दो से चार बजे तक शिक्षकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर व्यापक अभियान चलाया। #JusticeForTeachers हैशटैग के साथ चलाया गया यह अभियान कुछ समय के लिए वैश्विक स्तर पर ट्रेंड करता रहा।

Teachers Federation of India के बैनर तले देशभर के सरकारी शिक्षकों ने ऑनलाइन अभियान में भागीदारी की और अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई। आजमगढ़ जनपद के महाराजगंज विकासखंड अंतर्गत विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने भी सक्रिय रूप से भाग लेते हुए सोशल मीडिया पर अपना विरोध दर्ज कराया।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ तथा महिला शिक्षकों ने प्रदेश सरकार के रुख पर असंतोष जताया। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उनका तर्क है कि नियुक्ति के समय सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी की गई थीं, ऐसे में वर्षों बाद नया नियम लागू करना हजारों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सहायक अध्यापक विकास गुप्ता ने कहा कि सरकार को शिक्षकों की सेवा अवधि और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर अचानक टीईटी की बाध्यता थोपना अन्यायपूर्ण है, जिससे शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
वहीं शिक्षक रणंजय सिंह ने कहा कि फिलहाल शिक्षक शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि पुरानी नियुक्तियों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त किया जाए, ताकि शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और चिंता समाप्त हो सके।

घोषित कार्यक्रम के अनुसार शिक्षक 23 से 25 फरवरी तक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। 26 फरवरी को दोपहर एक से चार बजे तक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा तथा जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में देशव्यापी महारैली आयोजित कर केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा।







