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राजभर बनाम राजभर रैली, शक्ति प्रदर्शन या 2027 का ट्रेलर?

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मंत्री-मंत्री आमने सामने……

👉राजनीतिक चर्चा 

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश की सियासत में मौसम चाहे जो हो, चुनावी बयार हमेशा बहती रहती है। इस बार का बयार कुछ तेज़ है और केंद्र में है आजमगढ़, जहाँ एक ही दिन में एनडीए गठबंधन के दो-दो नेताओं ने ऐसा शंखनाद किया कि जनता भी सोच में पड़ गई—यह रैली थी, शक्ति प्रदर्शन था या 2027 का ट्रेलर?

एक दिन, दो मंच, कई दावे- एक ओर ओमप्रकाश राजभर ने अतरौलिया क्षेत्र के अहिरौला स्थित जनता इंटर कॉलेज में “सामाजिक समरसता” के नाम पर ऐसा ब्राह्मण शंखनाद किया कि समर्थकों ने इसे सामाजिक इंजीनियरिंग की मास्टरक्लास बता दिया। भीड़ देखकर मंत्री जी उत्साहित हुए और ऐलान कर दिया—“अभी तो यह झांकी है, पूरा खेल अभी बाकी है।”

एक कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री अनिल राजभर
एक कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री अनिल राजभर

उधर फूलपुर विधानसभा क्षेत्र में अनिल राजभर ने महाराजा सुहेलदेव जयंती के बहाने ऐसा जमावड़ा किया कि मानो 2027 का सेमीफाइनल आज ही खेला जा रहा हो। बिहार तक से लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को “सीमापार समरसता सम्मेलन” का रंग दे दिया।

राजभर विरादरी पर किसका ज्यादा हक?

दोनों मंचों से एक ही संदेश गया—राजभर समाज हमारे साथ है। अब बहस यह नहीं कि भीड़ कितनी थी, बल्कि यह कि “असली भीड़” किसकी थी। राजनीतिक गलियारों में चुटकी ली जा रही है कि अगर एक ही दिन में दो मंत्री मैदान में उतर आएँ, तो समझिए मुकाबला सिर्फ विपक्ष से नहीं, उत्साह से भी है।

कर्मभूमि बना आजमगढ़

पंचायती राज मंत्री बनने के बाद से ओमप्रकाश राजभर ने आजमगढ़ को लगभग कर्मभूमि बना लिया है। बताया जा रहा है कि महीने के सात दिन जिले में ही गुजारते हैं—इतना समय तो लोग अपने गांव में खेती देखने में भी नहीं लगाते। कप्तानगंज-अहिरौला मार्ग के 58 करोड़ रुपये के बजट का जिक्र कर उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तंज कसा कि “दस विधायक थे, सड़क नहीं सुधरी।” संदेश साफ था—अब सड़क भी चलेगी और सियासत भी।

10 की 10 सीटों का सपना- सामाजिक समरसता महारैली से ऐलान हुआ कि 2027 में आजमगढ़ की सभी 10 सीटें एनडीए की झोली में जाएंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लक्ष्य बड़ा रखो, तो चर्चा और बड़ी होती है। वरिष्ठ पत्रकारों की राय है कि जिस तरह गाजीपुर-बलिया में ज़मीन तैयार की गई, उसी फार्मूले पर आजमगढ़ में भी बिसात बिछाई जा रही है।

सपा के लिए अलर्ट?

लगातार सक्रियता और दो मंत्रियों के एक दिन में शक्ति प्रदर्शन से संकेत साफ हैं—आने वाले दिनों में मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। समाजवादी पार्टी के लिए यह “चेतावनी शंख” माना जा रहा है, जबकि भाजपा गठबंधन इसे “विजय शंख” बता रहा है। फिलहाल जनता तमाशबीन नहीं, बल्कि निर्णायक है। 2027 अभी दूर है, लेकिन आजमगढ़ में राजनीतिक थियेटर का पहला शो हाउसफुल दिख रहा है—और कलाकार पूरे जोश में हैं।

MANOJ GUPTA
Author: MANOJ GUPTA

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