बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन: BNP अध्यक्ष तारिक रहमान बने नए प्रधानमंत्री, 49 मंत्रियों ने भी ली शपथ!

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शपथ ग्रहण समारोह में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका सहित सामिल हुए अन्य देशों के 1000 मेहमान…….

ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने संसद भवन में आयोजित समारोह में उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। यह तारिक रहमान का पहला प्रधानमंत्री कार्यकाल है। शपथ ग्रहण के साथ ही बांग्लादेश में नई सरकार का गठन औपचारिक रूप से पूरा हो गया है। समारोह में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही और देश-विदेश के कई प्रमुख मेहमानों ने शिरकत की।

संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद बनी सरकार-प्रधानमंत्री बनने से पहले मंगलवार दोपहर को BNP के नवनिर्वाचित सांसदों ने बैठक कर तारिक रहमान को संसदीय दल का नेता चुना। इसके बाद राष्ट्रपति से मुलाकात और औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं। वे लंबे समय तक विदेश में रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 17 साल लंदन में रहने के बाद वे करीब दो महीने पहले ही बांग्लादेश लौटे थे।

25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्री भी बने- प्रधानमंत्री के साथ-साथ नई सरकार में 25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्री भी शपथबद्ध हुए। सरकार के गठन में खास बात यह रही कि मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। शपथ लेने वालों में—

हिंदू मंत्री निताई रॉय चौधरी, बौद्ध मंत्री दिपेन देवान चकमा भी शामिल हैं।

बताया गया कि 25 कैबिनेट मंत्रियों में से 17 नए चेहरे हैं, जबकि 24 राज्य मंत्री पूरी तरह नए हैं। इससे साफ है कि नई सरकार ने नेतृत्व में बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की कोशिश की है।

चुनाव में BNP को बड़ी जीत, 209 सीटों पर कब्जा BNP की यह सरकार 12 फरवरी को हुए आम चुनाव के बाद बनी है। चुनाव में BNP ने 299 सीटों में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। बहुमत के लिए जरूरी 150 सीटों के आंकड़े से पार्टी काफी आगे निकल गई। इसके अलावा 3 सीटों पर BNP की सहयोगी पार्टियों ने भी जीत दर्ज की, जिससे गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो गई।

सांसदों ने भी ली शपथ, साउथ प्लाजा में हुआ आयोजन- बांग्लादेश की 13वीं नेशनल पार्लियामेंट के नवनिर्वाचित सांसदों ने मंगलवार को संसद परिसर के साउथ प्लाजा में शपथ ली। सुबह करीब 10:42 बजे (स्थानीय समय) पर मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने सांसदों को शपथ दिलाई। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्यक्रम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुआ, जिसमें 1,000 से अधिक स्थानीय और विदेशी मेहमान शामिल हुए। शपथ से पहले कुरान का पाठ भी किया गया।

भारत की मौजूदगी: ओम बिरला शामिल, पीएम मोदी का निमंत्रण- नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला मौजूद रहे। शपथ के तुरंत बाद ओम बिरला ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की और भारत की तरफ से शुभकामनाएं दीं। बैठक में उन्होंने तारिक रहमान को भारत आने का निमंत्रण भी दिया। वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारिक रहमान को भारत आने का न्योता दिया है। इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम संकेत माना जा रहा है। भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह के मुताबिक, दोनों नेताओं ने भरोसा जताया कि भारत और बांग्लादेश मिलकर आम लोगों के हित में काम करेंगे, और द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।

‘जुलाई चार्टर’ को लेकर टकराव, संविधान बदलाव पर सियासी गर्मी- नई सरकार के गठन के बीच बांग्लादेश में संविधान में बदलाव को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। दरअसल, 12 फरवरी को संसद चुनाव के साथ-साथ ‘जुलाई चार्टर’ पर भी जनमत संग्रह कराया गया था। इसमें 62% मतदाताओं ने ‘हां’ में वोट दिया।

जुलाई चार्टर के अनुसार— नई संसद 180 दिनों तक संविधान सभा की तरह काम करेगी। इस अवधि में संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं में बड़े बदलाव किए जाएंगे।

चार्टर का उद्देश्य: शक्ति संतुलन और PM की ताकत में कटौती जुलाई चार्टर का मुख्य उद्देश्य देश में सत्ता के एकाधिकार को खत्म कर शक्ति संतुलन बनाना बताया जा रहा है।

चार्टर के प्रस्तावों के अनुसार— प्रधानमंत्री की शक्तियों में कटौती होगी। राष्ट्रपति की भूमिका और अधिकार बढ़ेंगे। कई स्वतंत्र संस्थाओं के प्रमुखों की नियुक्ति में राष्ट्रपति को ज्यादा अधिकार मिलेंगे।

BNP की आपत्ति: “ऐसी परिषद का संविधान में प्रावधान नहीं” हालांकि, BNP ने जुलाई चार्टर पर हस्ताक्षर जरूर किए थे, लेकिन पार्टी के कई नेता इसके प्रावधानों पर खुलकर आपत्ति जता रहे हैं। BNP की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य और सांसद सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि पार्टी का कोई भी सांसद संवैधानिक सुधार परिषद का सदस्य बनकर शपथ नहीं लेगा।

उनका तर्क है कि— वर्तमान संविधान में ऐसी किसी परिषद का कोई प्रावधान नहीं है। परिषद के लिए अलग शपथ फॉर्मेट भी मौजूद नहीं है, सांसद केवल संसद के लिए चुने गए हैं, किसी अलग संवैधानिक परिषद के लिए नहीं।

जुलाई चार्टर के प्रमुख प्रस्ताव- जुलाई चार्टर में कई बड़े और दूरगामी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें—प्रधानमंत्री के लिए कुल 10 साल (या अधिकतम 2 टर्म) की सख्त सीमा, प्रधानमंत्री का पार्टी चीफ पद पर बने रहना प्रतिबंधित, इमरजेंसी घोषित करने के लिए कैबिनेट + विपक्षी नेता की लिखित सहमति जरूरी

राष्ट्रपति को अधिक शक्तियां- द्विसदनीय संसद (ऊपरी सदन) का गठन कई संस्थाओं के लिए अलग-अलग सेलेक्शन कमिटी जैसे बिंदु शामिल हैं।

आगे की राह: सरकार गठन के साथ नई चुनौती भी तारिक रहमान की सरकार के सामने एक तरफ जहां देश को स्थिरता देने, आर्थिक सुधार और प्रशासनिक फैसले लेने की चुनौती होगी, वहीं दूसरी ओर जुलाई चार्टर और संविधान बदलाव को लेकर बढ़ता विवाद भी आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है। बांग्लादेश की नई संसद और सरकार अब यह तय करेगी कि सत्ता संतुलन, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक बदलावों को लेकर आगे किस दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।

ZFM Times
Author: ZFM Times

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