आजमगढ़ कोर्ट का बड़ा फैसला: कस्टोडियल डेथ में पूर्व इंस्पेक्टर को उम्रकैद, 1.05 लाख जुर्माना!

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29 मार्च 2003 को बैटरी चोरी के एक मुकदमे में हिरासत में लिया था व्यक्ति हिरासत में हो गई थी मौत…..

आजमगढ़। जनपद की अदालत ने 23 साल पुराने कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए रानी की सराय थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रहे जयेंद्र उर्फ जैनेंद्र कुमार सिंह को हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 1,05,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह निर्णय जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय की अदालत ने सुनाया। अदालत में पेश किए गए कुल सात गवाहों की गवाही और केस के साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला आया। फैसला सुनाए जाने के बाद सजायाफ्ता पूर्व इंस्पेक्टर को पुलिस की जिप्सी से ले जाते समय वह मुंह छुपाते हुए नजर आया।

पुलिस की जिप्सी से ले जाते समय  मुंह छुपाते हुए आरोपी इंस्पेक्टर
पुलिस की जिप्सी से ले जाते समय मुंह छुपाते हुए सजायाफ्ता पूर्व इंस्पेक्टर

बैटरी चोरी के मामले में उठाया गया था हिरासत में अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुकदमा जितेंद्र यादव (निवासी दौलतपुर, थाना मेंहनगर) के पिता हरिलाल यादव को पुलिस ने 29 मार्च 2003 को बैटरी चोरी के एक मुकदमे में हिरासत में लिया था। उसी रात जब परिवार को हिरासत की जानकारी मिली, तो जितेंद्र यादव अपने रिश्तेदार रामवचन यादव के साथ थाने पहुंचा।

थाने में पूछताछ के दौरान गोली मारने का आरोप- अभियोजन कहानी के मुताबिक, थाने में जितेंद्र यादव के सामने ही पूछताछ के दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष जे.के. सिंह के ललकारने पर दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह ने 30 मार्च 2003 को हरिलाल यादव को गोली मार दी। गोली लगने के बाद हरिलाल यादव को गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई

घटना के वक्त गवाहों को हवालात में बंद करने का आरोप- मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि घटना के समय थाने में मौजूद जितेंद्र यादव और रामवचन यादव को पुलिस ने हवालात में बंद कर दिया, ताकि घटना की सच्चाई सामने न आ सके। इसके बाद 30 मार्च 2003 को ही जितेंद्र यादव की तहरीर पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया।

पहले से दर्ज मुकदमे में शामिल हुआ केस- घटना के बाद रानी की सराय थाने में दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा पहले से दर्ज था। इसी कारण शहर कोतवाली में दर्ज केस को बाद में रानी की सराय थाने में दर्ज मुकदमे में शामिल कर दिया गया।

जांच CBCID को सौंपी गई, 2005 में दाखिल हुई चार्जशीट- इस गंभीर मामले में शासन ने सितंबर 2003 में जांच CBCID को सौंप दी। CBCID ने जांच के बाद फरवरी 2005 में चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई.

अदालत में सात गवाहों की गवाही- मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी और सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार मिश्रा ने पैरवी की। अदालत में कुल सात गवाहों को परीक्षित कराया गया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने तत्कालीन थानाध्यक्ष जयेंद्र उर्फ जैनेंद्र कुमार सिंह को दोषी करार दिया

कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा- अदालत ने पूर्व थानाध्यक्ष को आजीवन कारावास और 1,05,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

यह फैसला- पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामलों में एक अहम निर्णय माना जा रहा है, जिससे यह संदेश गया है कि कस्टोडियल हिंसा और गैरकानूनी कार्रवाई पर कानून की पकड़ कमजोर नहीं है।

ZFM Times
Author: ZFM Times

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