हिजाब विवाद: पर राजनीतिक बहस सुरु……

पटना। बिहार में आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब हटाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ दो राज्यों में जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस प्रकरण में पहली एफआईआर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के केसरबाग थाना में दर्ज की गई है। यह शिकायत समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता सुमैया राणा ने दर्ज कराई है, जो प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राणा की बेटी भी हैं। वहीं, बेंगलुरु में अधिवक्ता ओवैज हुसैन ने भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज कराई है। ओवैज हुसैन ने आरोप लगाया है कि इस कृत्य से महिला की मर्यादा भंग हुई है।

समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता सुमैया राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा एक महिला का सार्वजनिक रूप से हिजाब हटाने का वीडियो सामने आने के बाद महिलाओं में गहरा रोष है। उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा कि वह स्वयं हिजाब पहनती हैं और यदि उनके साथ ऐसा व्यवहार होता तो वह चुप नहीं बैठतीं। इस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने आचरण में सावधानी बरतनी चाहिए थी।
वहीं, बिहार सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने विवाद पर मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने “पितृतुल्य स्नेह” के भाव से ऐसा किया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उम्र में उस युवती के पिता से भी बड़े हैं और इस घटना को उसी भाव से देखा जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाने के दौरान यह घटना घटी, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस कृत्य को अपमानजनक और अस्वीकार्य बताया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से किसी अन्य व्यक्ति का अपमान करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री उस महिला को नियुक्ति पत्र नहीं देना चाहते थे तो उन्हें अलग कर सकते थे, लेकिन सबके सामने इस तरह व्यवहार करना गलत है। उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय गरिमा को कमजोर करती हैं, विशेषकर तब जब ऐसे कृत्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा किए जाते हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि बिहार के मुख्यमंत्री की सार्वजनिक छवि पर इसका असर पड़ सकता है, जिन्हें कभी एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में देखा जाता था।
हिजाब विवाद को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गरमाने के आसार हैं।




