मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में जिलाधिकारी की चाल पर छिड़ी चर्चा…..
आजमगढ़। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत फूलपुर में आयोजित कार्यक्रम शुक्रवार को आयोजन से अधिक कटाक्ष और तंज का मंच बन गया। समारोह में समाजवादी पार्टी की पूर्व राज्यसभा सदस्य व फिल्म अभिनेत्री शबाना आज़मी को जिलाधिकारी द्वारा मुख्य अतिथि बनाए जाने व भाजपा लालगंज जिलाध्यक्ष विनोद राजभर का नाम मुख्य अतिथि के दूसरे लाइन में लिखें जाने के बाद भाजपा नेताओं के चेहरे ऐसे उतर गए मानो पूरा मंच विपक्ष ने ही हाइजैक कर लिया हो।
सूत्रों के अनुसार जैसे ही भाजपा नेताओं को पता चला कि कार्यक्रम की स्टार चेहरा शबाना आज़मी होंगी और कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा उन्हीं के इर्द-गिर्द घूम रही है, भाजपा लालगंज जिलाध्यक्ष विनोद राजभर एवं अन्य नेता मंच छोड़कर चले गए। पूरे कार्यक्रम में भाजपा के बड़े चेहरे नदारद दिखे, मानो यह भाजपा सरकार के सरकारी आयोजन नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी के ‘विशेष मेहमानों’ के लिए तैयार किया गया निजी समारोह हो।
लोगों का कहना था कि “योगी सरकार के कार्यक्रम में ही अफसरशाही ने भाजपा को साइडलाइन कर दिया।” आमतौर पर इस योजना के कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के बड़े बैनर तले भाजपा नेताओं की भारी मौजूदगी दिखती है, लेकिन फूलपुर में तो पूरा वातावरण ही उलटा नजर आया, जिला या स्थानीय स्तर का बड़ा भाजपा चेहरा छोड़िए आम प्रमुख कार्यकर्त्ता भी नहीं नज़र आएं।

दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में व मंच पर सपा समर्थित राज्यसभा सदस्य रहीं शबाना आज़मी और अर्चना यादव (समाजवादी पार्टी चेहरा व ब्लॉक प्रमुख) मौजूद रहीं—और भाजपा का कोई नेता उस फोटो फ्रेम में दिखाई न दिया, यही नहीं कार्यक्रम के मुख्य मंच पर ऐसे चेहरे अधिक आ गए, जिनका भाजपा से या अतिथि रूप में दूर दूर तक कोई संबंध नहीं था, देखते ही देखते राजनीतिक गलियारों में यह तस्वीर तेजी से चर्चा का विषय बन गई।मंच पर हलचल व चर्चा बढ़ते ही शबाना आज़मी भी अचानक कार्यक्रम स्थल से चली गईं। दिलचस्प बात यह रही कि जिलाधिकारी रविंद्र कुमार भी उनके साथ ही निकल पड़े, जिससे अटकलें और तेज हो गईं कि आखिर इस ‘विशेष सम्मान’ के पीछे क्या संदेश था?
भाजपा पदाधिकारियों के सम्मान की अनदेखी अब क्षेत्रीय राजनीति में गर्म मुद्दा बन चुकी है। सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा सरकार में ही अफसरशाही नेताओं की उपेक्षा कर रही है, या फिर इस मामले में भी परंपरागत “लीपापोती” कर के इति श्री कर दी जाएगी? फूलपुर का यह सामूहिक विवाह समारोह अब विवाह से कम और ‘राजनीतिक कटाक्ष व अफसरशाही बनाम राजनीति’ की मिसाल अधिक बनकर उभर रहा है।
रिपोर्ट… ZFM TIMES




