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राष्ट्रपति के सम्मान में नहीं पहुंची CM ममता तो राष्ट्रपति का छलका दर्द, मोदी ने भी कह दी बड़ी बात!

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राष्ट्रपति के कार्यक्रम को परमिशन लेकर भी होता रहा लेट लतीफ…..

दार्जिलिंग। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रपति Droupadi Murmu और राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू ने जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यक्रम में उपस्थित न रहने पर नाराजगी जताई।

सिलीगुड़ी के बिधानगर में आयोजित सभा में राष्ट्रपति ने कहा कि मुख्यमंत्री को उनके कार्यक्रम में साथ होना चाहिए था। उन्होंने कहा, “मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है। ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, शायद वह मुझसे नाराज हैं। इसीलिए मुझे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहां (गोशाईपुर) जाना पड़ा। हालांकि मुझे इस बात का कोई गुस्सा या नाराजगी नहीं है।”

 

राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद माना जाता है और उन्हें देश का प्रथम नागरिक कहा जाता है। राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान विशेष प्रोटोकॉल लागू होता है, जिसके तहत राज्य सरकारों और अधिकारियों को निर्धारित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होती हैं। राष्ट्रपति के कार्यक्रम, सुरक्षा और उपस्थित लोगों की सूची भी पहले से तय रहती है और उसमें बदलाव नहीं किया जाता।

राष्ट्रपति मुर्मू की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी इस घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह “शर्मनाक और अभूतपूर्व” है।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर कहा कि लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाले सभी लोग इस घटना से निराश हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं आदिवासी समाज से आने वाली राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा ने देशवासियों को दुखी किया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति के सम्मान और प्रोटोकॉल की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

वहीं इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कोई साल में एक बार आएगा तो उसका स्वागत करेंगे, लेकिन 50 बार आएगा तो नहीं।”

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है। विपक्षी दलों और कई राजनीतिक नेताओं ने इसे राष्ट्रपति पद की गरिमा के प्रति असम्मानजनक बताया है, जबकि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकरण के बाद केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।

MANOJ GUPTA
Author: MANOJ GUPTA

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