नेपाल में “जेन जी” आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे “बालेन शाह ” बन सकते हैं नेपाल के प्रधानमंत्री….
काठमांडू। नेपाल में हुए आम चुनाव की मतगणना अभी जारी है, लेकिन शुरुआती रुझानों में रैपर से राजनेता बने बलेंद्र शाह ने बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि वे देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। गुरुवार को हुए चुनाव में शाह का मुकाबला प्रमुख राजनीतिक नेताओं से था, जिनमें केपी शर्मा ओली और गगन थापा जैसे दिग्गज शामिल थे।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शुक्रवार शाम तक गिने गए मतों के रुझानों में शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि 165 प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में से दो-तिहाई से अधिक सीटों पर आरएसपी के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। दूसरे स्थान पर नेपाली कांग्रेस काफी पीछे है, जबकि तीसरे स्थान पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के उम्मीदवार बताए जा रहे हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम परिणाम आने में अभी समय लग सकता है। नेपाल एक पर्वतीय देश होने के कारण दूरदराज के इलाकों से मतपेटियां लाने में काफी समय लगता है। कई क्षेत्रों से मतपत्रों को हेलीकॉप्टर के जरिए लाया जाता है, जिसके चलते मतगणना की प्रक्रिया धीमी रहती है। अधिकारियों का अनुमान है कि पूरे परिणाम अगले सप्ताह से पहले सामने नहीं आ पाएंगे। उल्लेखनीय है कि 2022 के पिछले आम चुनाव के अंतिम नतीजे आने में भी दो सप्ताह से अधिक का समय लगा था।

नेपाल की संसद में कुल 275 सदस्य होते हैं और इस चुनाव में जनता ने अपने नए राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ इन सभी सांसदों को चुनने के लिए मतदान किया। नेपाल की चुनाव प्रणाली मिश्रित है, जिसमें “फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट” और “आनुपातिक प्रतिनिधित्व” दोनों व्यवस्था शामिल हैं। इसके तहत 165 सांसद सीधे चुनाव के माध्यम से चुने जाते हैं, जहां सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार विजेता घोषित होता है। वहीं 110 सांसदों का चयन राजनीतिक दलों को मिले कुल राष्ट्रीय वोट प्रतिशत के आधार पर किया जाता है। प्रत्येक मतदाता को दो वोट देने का अधिकार दिया गया था।
इस चुनाव में लगभग 1.9 करोड़ मतदाता मतदान के पात्र थे। चुनाव आयोग के मुताबिक मतदान समाप्त होने के बाद अनुमान लगाया गया कि करीब 60 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

35 वर्षीय शाह, जिन्हें नेपाल में “बालेन” के नाम से भी जाना जाता है, युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। पेशे से स्ट्रक्चरल इंजीनियर रहे शाह नेपाली हिप-हॉप संस्कृति से भी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कई गीत जारी किए हैं जिनमें सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया गया है। उनका चर्चित गीत “बलिदान” सोशल मीडिया और यूट्यूब पर लाखों बार देखा जा चुका है।

पिछले वर्ष नेपाल में हुए बड़े – GEN G -विरोध प्रदर्शनों के दौरान शाह की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। यह आंदोलन शुरुआत में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन बाद में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक संकट के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन में बदल गया। इन प्रदर्शनों में हिंसा भी हुई, जिसमें 77 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय पुलिस पर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोप लगे थे और भारी दबाव के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी ओली को पद छोड़ना पड़ा था।

चुनाव अभियान के दौरान शाह ने कई बार प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और तत्कालीन सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की। एक अवसर पर उन्होंने केपी ओली पर कड़ा हमला करते हुए उन्हें देश के साथ विश्वासघात करने वाला तक कह दिया था। हालांकि, उनकी तीखी बयानबाजी को लेकर विपक्षी दलों और कुछ विश्लेषकों ने सवाल भी उठाए हैं और तर्क दिया है कि इतनी कम राजनीतिक अनुभव वाले नेता के लिए देश चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल नेपाल की जनता और राजनीतिक दलों की नजर अंतिम मतगणना पर टिकी हुई है। यदि शुरुआती रुझान बरकरार रहते हैं, तो बलेंद्र शाह का सत्ता के शीर्ष तक पहुंचना तय माना जा रहा है, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।







