गमन से मेडिकल कालेज़ की व्यवस्था चरमराई ही साथ ही इसकी साख में भी बट्टा लगा…..
आज़मगढ़। सरायमीर स्थित इब्न-ए-सिना तिब्बिया कॉलेज और अस्पताल, में बीयूएमएस में प्रवेश के नाम पर बड़े पैमाने पर धन की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन और स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है। घटना के खुलासे के बाद कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है।
बीनपारा सरायमीर क्षेत्र में स्थित इब्न-ए-सिना तिब्बिया कॉलेज और अस्पताल जिले का एक प्रमुख मान्यता प्राप्त संस्थान है, जो यूनानी चिकित्सा (BUMS) में शिक्षा और डिग्री प्रदान करता है। यह कॉलेज 1980 में स्थापित किया गया था और यहां 50 सीटों के साथ 4.5 साल + 1 साल की इंटर्नशिप वाला BUMS पाठ्यक्रम उपलब्ध है, लेकिन 2014 में कॉलेज के तत्कालीन मैनेजर अब्दुल कय्यूम ने ऐसा धन गमन किया की इस मेडिकल कालेज़ की व्यवस्था चरमराई ही साथ ही इसकी साख में भी बट्टा लगा दिया, अब जब इनके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो चुका और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार भी कर लिया इस गंभीर आरोप में कोर्ट द्वारा इनको जेल भेजे जाने के बाद यह स्वास्थ्य का बहाना बनाकर (मेडिकल फैसिलिटी )स्वास्थ्य का लाभ उठा रहे, काफी शातिर दिमाग का यह व्यक्ति किसी भी प्रकार के षडयंत्र रचने में माहिर है
इस सम्बन्ध में कॉलेज के मैनेजर एजाज अहमद ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि 30 सितंबर 2014 को कॉलेज के तत्कालीन मैनेजर अब्दुल कय्यूम ने बीयूएमएस पाठ्यक्रम में प्रवेश दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से कथित रूप से प्रति छात्र 1 लाख 20 हजार रुपये वसूले। बताया गया कि इस तरह कुल 60 लाख 51 हजार रुपये की राशि एकत्र की गई, लेकिन बैंक रिकॉर्ड के अनुसार 25 सितंबर 2014 से 1 फरवरी 2015 के बीच कॉलेज के खाते में कोई धनराशि जमा नहीं की गई।
शिकायत के अनुसार, इस मामले में अब्दुल कय्यूम के अलावा अबू सुफियान, अहमद तथा अबू अल-कलाम पर भी प्रवेश के नाम पर धन लेने का आरोप है। आरोप है कि कॉलेज की रसीदों में भी सफेद स्याही से हेरफेर कर रिकॉर्ड मिटाने का प्रयास किया गया।
मैनेजर एजाज अहमद के लिखित बयान के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467 और 468 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और मुख्य आरोपी अब्दुल कय्यूम को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य का बहाना बनाकर वह कोर्ट और जेल प्रशासन को भी गुमराह करने में लगा है,

मैनेजर का कहना है कि इतनी बड़ी राशि के गबन से कॉलेज की शैक्षणिक प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। उन्होंने बताया कि यह संस्थान वरिष्ठ लोगों के प्रयास और समर्पण से स्थापित हुआ था और लंबे समय से ईमानदारी के साथ संचालित हो रहा था। फिलहाल कॉलेज प्रशासनिक मतभेदों और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वहीं स्थानीय लोग कॉलेज के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एकजुट होने की बात कह रहे हैं और संस्थान के पुनर्गठन की उम्मीद जता रहे हैं।







