ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध पर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर देश की राजनीति गर्म….
नई दिल्ली। इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात को लेकर जहां वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है, वहीं भारत में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद देश के कुछ हिस्सों में एक वर्ग विशेष द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी के चलते अब तक किसी भी राज्य से किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर देश की राजनीति भी गर्म होती दिख रही है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। सत्तारूढ़ गठबंधन की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी पर विपक्ष का आरोप है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर स्पष्ट बयान देने से बच रही है।केंद्र की मोदी सरकार फिलहाल संतुलित और न्यूट्रल रुख अपनाए हुए नजर आ रही है। वहीं विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटी है।
इसी क्रम में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लेख लिखकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वहीं पार्टी सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अंग्रेजी में पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल सकता है।

राहुल गांधी ने लिखा कि लगभग एक करोड़ भारतीयों सहित करोड़ों लोग इस अनिश्चितता से प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन संकट को और गंभीर बना सकता है। ईरान पर एकतरफा हमलों के साथ-साथ ईरान द्वारा अन्य मध्य-पूर्वी देशों पर किए गए हमलों की भी कड़ी निंदा होनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि हिंसा से केवल हिंसा ही जन्म लेती है और संवाद व संयम ही शांति का एकमात्र रास्ता है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से बोलने की अपील करते हुए कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव जीवन की रक्षा के पक्ष में नैतिक रूप से स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि भारत इस संवेदनशील वैश्विक संकट में संतुलित कूटनीतिक रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बीच देश की सियासत में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी का दौर जारी है।







