बसंत पंचमी पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, 3.56 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी!

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बसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के दृष्टिगत अभूतपूर्व व्यवस्थाएं की गई…..

रिपोर्ट… अरुण गुप्ता

प्रयागराज। विद्या, ज्ञान और नवचेतना के प्रतीक माघ मेला-2026 के चतुर्थ स्नान पर्व बसंत पंचमी के अवसर पर प्रयागराज में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस पावन पर्व पर लगभग 3 करोड़ 56 लाख श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की संख्या ने दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

शास्त्रों में बसंत पंचमी स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। माघ मेले के दौरान इस दिन किया गया स्नान विशेष फलदायी माना जाता है, इसी आस्था के चलते देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार और प्रशासन द्वारा अभूतपूर्व व्यवस्थाएं की गई थीं, जिससे पूरे मेला क्षेत्र में अनुशासन और ऊर्जा का वातावरण बना रहा। स्नान पर्व को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी लगातार भ्रमणशील रहे। इस दौरान अपर पुलिस महानिदेशक ज्योति नारायण, पुलिस महानिरीक्षक अजय मिश्र, मंडलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेन्द्र कुमार, अपर पुलिस आयुक्त डॉ. अजयपाल शर्मा, जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी ऋषिराज तथा मेला पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय द्वारा समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध कराई गई रैपिडो बाइक सेवा का भी व्यापक उपयोग हुआ। बसंत पंचमी के दिन करीब 13,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने इस सेवा का लाभ लिया, जबकि अब तक 2.70 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा चुका है।

इधर, संगम की रेती पर आयोजित माघ मेले में साधु-संतों की कठिन साधनाएं और अनुष्ठान भी श्रद्धा का केंद्र बने रहे। श्री परमहंस आश्रम सगरा गौरीगंज (अमेठी) के पीठाधीश्वर स्वामी अभय चैतन्य ब्रह्मचारी शिव योगी मौनी महाराज ने बसंत पंचमी के अवसर पर अपनी 1446वीं चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा पूर्ण की। उन्होंने यह परिक्रमा आतंकवाद के विनाश, बांग्लादेशी हिंदुओं की रक्षा और धर्मांतरण रोकने की कामना के साथ की। मौनी महाराज अपने शिविर से लगभग डेढ़ किलोमीटर तक लोटते हुए गंगा तट पहुंचे, जहां त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इसके साथ ही गंगा जल में खड़े होकर शिवलिंग का अभिषेक, हवन और पूजन भी किया।

इस अवसर पर मौनी महाराज ने कहा कि बसंत पंचमी ऋतु परिवर्तन का पावन पर्व है। इस दिन त्रिवेणी स्नान से साधकों को विशेष साधना फल प्राप्त होता है। मां सरस्वती की आराधना, यज्ञोपवीत और पीली वस्तुओं के दान से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। समग्र रूप से बसंत पंचमी का यह स्नान पर्व आस्था, अनुशासन, प्रशासनिक दक्षता और सनातन परंपराओं की जीवंतता का भव्य उदाहरण बनकर सामने आया।

ZFM Times
Author: ZFM Times

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