प्रयागराज संगम माघ मेला प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना…..
प्रयागराज। सनातन सम्राट एवं अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमपूज्य स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने आज तीर्थराज प्रयागराज के पावन संगम तट पर विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आस्था की पवित्र डुबकी लगाई। संगम स्नान के दौरान उन्होंने सनातन धर्म की अखंडता, राष्ट्र की एकता, सामाजिक समरसता तथा विश्व कल्याण की मंगल कामना की।
जानकारी के अनुसार, परमपूज्य स्वामी चक्रपाणि जी महाराज वीआईपी घाट पर पहुंचे, जहां से प्रशासन की ओर से स्टीमर की विशेष व्यवस्था की गई थी। स्टीमर के माध्यम से वे संगम नोज तक पहुंचे और वहां विधिवत संगम स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

संगम स्नान के उपरांत स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने माघ मेले एवं मेला प्रशासन की व्यवस्थाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित और सराहनीय प्रबंध किए गए हैं, जिससे देश-विदेश से आए श्रद्धालु सहजता एवं शांति के साथ स्नान व दर्शन कर पा रहे हैं। यह व्यवस्थाएं प्रशासन की संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण हैं।

इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक अवसर पर अखिल भारत हिन्दू महासभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री अनुपम मिश्रा, संगठन मंत्री श्री राजकुमार सिंह, वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री कुमार नारायण सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान श्री कुमार नारायण द्वारा स्वामी चक्रपाणि जी महाराज का आत्मीय स्वागत किया गया। साथ ही पूरी प्रयागराज यात्रा, संगम स्नान एवं कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्थाएं भी उन्हीं के द्वारा की गईं, जिससे आयोजन सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने उनके समर्पण एवं सेवाभाव के लिए आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा ही भारत की पहचान और राष्ट्र की मूल चेतना है। इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रत्येक सनातनी को संगठित होकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने तीर्थराज प्रयाग को भारत की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बताया।
कार्यक्रम के दौरान संगम तट का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। “हर-हर महादेव”, “जय गंगा मैया”, “धर्म की जय” और “तीर्थराज प्रयाग की जय” के गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ, जिससे संगठन के कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और सनातन चेतना का संचार देखने को मिला।




