युवा पीढ़ी ही करेगी विकसित भारत का सपना साकार” — राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

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ऑर्गेनिक खेती नहीं करेंगे तो अवार्ड से वंचित रहेंगे छात्र….

आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आने वाला समय युवाओं का है। विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि जब देश का हर युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” के संकल्प को अपना लक्ष्य बनाएगा, तभी 140 करोड़ भारतीयों का सपना साकार होगा।

राज्यपाल ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने वन में रहकर बिना संसाधन के शोध और औषधियों की खोज की, आज हमारे पास अपार सुविधाएं हैं, इसलिए युवाओं को इस अवसर का पूरा उपयोग करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि “रोजगार ही जीवन का लक्ष्य नहीं है, आत्मनिर्भर बनना ही सच्ची सफलता है।”

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे पढ़ाई के साथ कुछ नया सीखें और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से बातचीत के दौरान पाया गया कि अधिकतर युवा अब सरकारी नौकरी की जगह स्वरोजगार की सोच रख रहे हैं — यह बदलाव सही दिशा का संकेत है।

ऑर्गेनिक खेती पर सख्त निर्देश

कृषि शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को राज्यपाल ने विशेष संदेश देते हुए कहा, “यदि आप अपने खेतों में ऑर्गेनिक खेती नहीं करेंगे तो आपको भविष्य में अवार्ड से वंचित कर दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि पढ़ाई का असली उद्देश्य यह है कि जो ज्ञान मिले, उसका उपयोग जीवन में किया जाए।

उपस्थिति पर सख्ती

राज्यपाल ने विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि “किसी भी विद्यार्थी की कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए, अन्यथा उन्हें परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।” इस संबंध में राजभवन द्वारा सभी विश्वविद्यालयों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि “माता-पिता मेहनत से फीस जमा करते हैं, ऐसे में छात्रों की अनुपस्थिति उन्हें मानसिक आघात पहुंचा सकती है।” गुरु-शिष्य संवाद को शिक्षा का मूल आधार बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि “केवल पुस्तकों से शिक्षा पूर्ण नहीं हो सकती।”

स्वर्ण पदक से सम्मानित हुए छात्र

कार्यक्रम के दौरान 68 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और 40 को उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल ने कहा कि स्वर्ण पदक पाने वाली बेटियों की संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि “बेटियां नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।” मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, “अगर यही स्थिति रही तो महिलाओं के लिए अलग विश्वविद्यालय बनाना पड़ेगा।”

शोध प्रस्तावों पर जोर

राज्यपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सरकार के पास शोध के लिए धन की कोई कमी नहीं है, लेकिन विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव नहीं मिलते। उन्होंने कुलपतियों से आग्रह किया कि वे अधिकाधिक शोध प्रस्ताव भेजें ताकि प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में और आगे बढ़े।

मुख्य अतिथियों के विचार

मुख्य अतिथि स्वामी चिदानंद ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि यह दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्कि शिक्षा का प्रसाद पाने का है। उन्होंने विद्यार्थियों से “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ जीवन की नई यात्रा आरंभ करने का आह्वान किया।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि “दीक्षांत, शिक्षांत नहीं है।” उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अर्जित शिक्षा का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करें। उन्होंने कहा कि “उत्तर प्रदेश अब उच्च शिक्षा का हब बनता जा रहा है, और विश्वविद्यालय नैक ग्रेडिंग में ऊंचे स्थान पा रहे हैं।”

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि जीवन में सफलता और असफलता दोनों मिलेंगी, लेकिन निरंतर प्रयास ही आगे बढ़ने का मंत्र है। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारत विकसित देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”

कार्यक्रम का समापन

दीक्षांत समारोह के अंत में कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने राज्यपाल से समारोह के समापन की घोषणा करने का अनुरोध किया। राज्यपाल ने द्वितीय दीक्षांत समारोह के समापन की औपचारिक घोषणा की।

इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा तैयार पर्यावरण संदेशों की प्रदर्शनी भी हुई, जिसकी राज्यपाल ने सराहना की। कार्यक्रम में कुल 6 पुस्तकों का लोकार्पण भी महामहिम के हाथों हुआ।

राज्यपाल ने कहा, “किताबों की दुनिया खूबसूरत होती है — इन्हें अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए ताकि जीवन में नयापन आए।”

दीक्षांत समारोह में जिले और प्रदेश की अनेक विभूतियां, प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएं और अभिभावक उपस्थित रहे। पूरा परिसर गौरव और उत्साह से ओतप्रोत नजर आया।

ZFM Times
Author: ZFM Times

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