वैश्विक युग में अमेरिका का नया युद्ध……
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए 50% आयात शुल्क (टैरिफ कार्ड) ने भारत की अर्थव्यवस्था और निर्यात कारोबार पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। जिसका प्रभाव बहुत से प्रोडक्ट पर दिखनी शुरू हो गई है। हालांकि भारत सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्पना पर स्थानीय कारोबारी भरोसा करते हुए आगे सुधार की उम्मीद किए हुए है,वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब $86 अरब डॉलर से घटकर $50 अरब डॉलर तक सिमट सकता है। सबसे ज्यादा झटका टेक्सटाइल, हीरे-ज्वैलरी, झींगा (सी फूड) और कालीन उद्योग को लगने की आशंका है, जहां निर्यात में 70% तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।

नौकरी और उद्योग पर प्रभाव
हीरे की कटाई–पॉलिशिंग का वैश्विक केंद्र सूरत पहले ही बुरी तरह प्रभावित है। यहां हजारों मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं और लाखों की रोज़गार पर संकट मंडरा रहा है। इसी तरह तिरुपुर का वस्त्र उद्योग और छोटे-मझोले निर्यातक भी भारी दबाव में हैं, उत्तर प्रदेश के भदोही सहित देश के अन्य कालीन निर्माता शहर व क्षेत्र में इश्क उद्योग से जुड़े लोगों में व्यावसायिक भविष्य को लेकर दहशत व्याप्त है.

GDP पर झटका
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों का अनुमान है कि ट्रंप के टैरिफ से भारत की GDP ग्रोथ में 0.3% से लेकर 1% तक की गिरावट हो सकती है।

ट्रंप के टैरिफ बम से कौन-से सेक्टर अभी सुरक्षित?
फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ क्षेत्रों को फिलहाल छूट मिली हुई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं रहेगी क्योंकि जिद्दी ट्रंप के मन मुताबिक काम न होने पर यह और कड़े रुख अपनाएंगे जिससे इन सेक्टरों पर भी प्रभाव पड़ना निश्चित है,
ट्रंप के टैरिफ को लेकर भारत की रणनीति
भारत सरकार ने निर्यातकों को नए बाज़ार खोजने और वैकल्पिक व्यापार साझेदारियों पर जोर दिया है। यूरोप, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।

ट्रंप के अड़ियल रुख का राजनैतिक असर
इन टैरिफ्स ने अमेरिका–भारत संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। हला कि व्यापारिक दबाव के चलते भारत अब बहुध्रुवीय नीति (Multipolar Strategy) की ओर और तेज़ी से बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, ट्रंप का यह “टैरिफ कार्ड” भारत के लिए एक आर्थिक चुनौती और कूटनीतिक परीक्षा साबित हो रहा है।




