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पूर्व मुस्लिम सलीम वास्तिक पर हुए हमले की जांच तेज़ पाकिस्तानी यूट्यूबर की संदिग्ध भूमिका!

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बेटों के एनकाउंटर पर पिता ने उठाए सवाल, कहां जेल होनी चाहिए थी…..

लखनऊ/गाजियाबाद। खुद को पूर्व मुस्लिम (Ex-Muslim) बताने वाले गाजियाबाद निवासी सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले की जांच अब कई नए और चौंकाने वाले पहलुओं की ओर इशारा कर रही है। हमले के सात दिन बाद गुरुवार को सलीम को होश आया है। फिलहाल उनका इलाज दिल्ली के मैक्स अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है, जबकि जांच एजेंसियां इस हमले के पीछे की साजिश और संभावित मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हैं।

अस्पताल प्रशासन की ओर से परिजनों को दिया गया पांच सेकेंड का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सलीम वास्तिक अस्पताल के बेड पर ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ दिखाई दे रहे हैं। उनके गले पर ऑपरेशन के बाद टांके लगे हैं। वीडियो में डॉक्टर के कहने पर सलीम आंख खोलते और जीभ बाहर निकालते दिखाई देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, हालांकि जख्म गहरे होने के कारण पूरी तरह स्वस्थ होने में समय लग सकता है।

10 दिन तक की गई रेकी, तीन बार नाकाम रहा हमला

जांच में सामने आया है कि हमलावर जीशान और गुलफाम पिछले करीब दस दिनों से सलीम की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। सूत्रों के मुताबिक 18 फरवरी से दोनों सलीम की मूवमेंट ट्रैक कर रहे थे और इस दौरान तीन बार हमला करने की कोशिश भी की, लेकिन हर बार उनके साथ किसी न किसी के मौजूद होने के कारण योजना विफल हो गई। 27 फरवरी को मौका मिलते ही दोनों ने हमला कर दिया। उस दिन सलीम नमाज पढ़कर अपने ऑफिस लौटे थे और अकेले थे। इसी दौरान जीशान और गुलफाम ने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

हमले से पहले बनाया “आखिरी वीडियो”– जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि जीशान को हमले के बाद अपनी संभावित मौत या गिरफ्तारी का अंदेशा था। इसी कारण वह 17 फरवरी को आखिरी बार अपने माता-पिता से मिलने गांव गया था। उसी दिन उसने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह ऑटो में बैठा दिखाई दे रहा है और बैकग्राउंड में एक गजल की पंक्तियां चल रही हैं—

“शौक को आज़िम-ए-सफर रखिए, बेखबर बन के सब खबर रखिए… जाने किस वक्त कूच करना हो, अपना सामान मुख्तसर रखिए।”– जांच एजेंसियां इस वीडियो को भी संभावित साजिश के संकेत के रूप में देख रही हैं।पाकिस्तानी यूट्यूबर और टेलीग्राम ग्रुप की भूमिका जांच के घेरे में

जांच में यह भी सामने आया है कि जीशान एक यूट्यूब चैनल चलाता था और कथित तौर पर एक पाकिस्तानी यूट्यूबर के उकसावे में आकर उसने अपने भाई गुलफाम के साथ मिलकर यह हमला किया। दोनों एक कट्टरपंथी संगठन से जुड़े टेलीग्राम ग्रुप में सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिसमें करीब 18 हजार से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। हमले के बाद इसी टेलीग्राम ग्रुप पर सलीम की तस्वीर पोस्ट कर यह संदेश लिखा गया—

“Ex मुस्लिम सलीम को अस्पताल पहुंचा दिया गया है, वीडियो चाहिए?”

यह पोस्ट अब जांच एजेंसियों के लिए एक अहम डिजिटल सबूत बन गया है।

एनकाउंटर के बाद उठा विवाद

पुलिस कार्रवाई में मृत दोनों आरोपियों के पिता बुनियाद अली
पुलिस कार्रवाई में मृत दोनों आरोपियों के पिता बुनियाद अली

हमले के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। बाद में पुलिस मुठभेड़ में जीशान और गुलफाम मारे गए। हालांकि इस एनकाउंटर को लेकर उनके पिता बुनियाद अली ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि उनके बेटे दोषी थे तो उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि वह इतने सक्षम नहीं हैं कि सुप्रीम कोर्ट जाकर न्याय की लड़ाई लड़ सकें।

अस्पताल में सुरक्षा कड़ी- दिल्ली के मैक्स अस्पताल के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अस्पताल के बाहर एक क्यूआरटी पुलिस वैन तैनात है और गाजियाबाद पुलिस लगातार डॉक्टरों के संपर्क में है।

सलीम के बेटे उस्मान के मुताबिक हमले के बाद से उनके पिता बेहोश थे और 5 मार्च को पहली बार उन्हें होश आया है। डॉक्टरों का कहना है कि चाकू लगने से लिवर को भी नुकसान पहुंचा है, जिसे दवाओं के जरिए ठीक करने की कोशिश की जा रही है।

इलाज के लिए आर्थिक मदद की जरूरत- परिजनों के अनुसार सलीम के इलाज में करीब 50 लाख रुपये तक खर्च आने का अनुमान है। अभी तक जमा पूंजी और लोगों की मदद से इलाज चल रहा है। हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने भी अस्पताल पहुंचकर आर्थिक मदद का भरोसा दिया है।

मास्टरमाइंड की तलाश जारी- हालांकि हमलावरों की मौत के बाद भी जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस हमले की असली साजिश किसने रची। पुलिस जीशान और गुलफाम के संपर्क में रहे लोगों, सोशल मीडिया गतिविधियों और टेलीग्राम नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

जांच अधिकारी मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, विदेशी प्रभाव और स्थानीय संपर्कों की कड़ियां इस मामले को और भी संवेदनशील बना सकती हैं। इसलिए पूरे प्रकरण की जांच बहुस्तरीय तरीके से की जा रही है।

MANOJ GUPTA
Author: MANOJ GUPTA

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