पंचायत चुनाव 2026 के लिए ओबीसी आरक्षण के पेच में फंसी प्रक्रिया……
ZFM TIMES – विशेष लेख
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तस्वीर साफ होती नहीं दिख रही है। पंचायत चुनाव का प्रस्तावित समय अप्रैल से जून 2026 के बीच माना जा रहा है, लेकिन ओबीसी आरक्षण को लेकर आयोग गठन और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया ने चुनावी कार्यक्रम को उलझा दिया है। इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने यह आश्वासन दिया है कि पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित आयोग (डेडिकेटेड कमीशन) का गठन किया जाएगा। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि चुनाव निर्धारित समय सीमा में नहीं कराए गए, तो फिर विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के कारण पंचायत चुनाव 2027 के बाद ही कराए जा सकते हैं।
2 मई को खत्म हो रहा मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव वर्ष 2021 में हुए थे। नियमानुसार ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यदि चुनाव समय पर नहीं होते हैं तो राज्य में पंचायत व्यवस्था के संचालन को लेकर प्रशासनिक विकल्प के तौर पर रिसीवर/प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी की चर्चा भी सामने आ रही है।

हाईकोर्ट में सरकार का आश्वासन: आयोग बनेगा, आरक्षण तय होगा- इलाहाबाद हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि चुनाव से पहले ओबीसी आयोग का गठन कर आरक्षण तय किया जाएगा। हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चुनाव की संभावित तारीख क्या होगी। सरकारी पक्ष का कहना है कि आयोग गठित होने के बाद नियमों के अनुसार सर्वे, आंकड़ों का परीक्षण और आरक्षण की रूपरेखा तैयार कर ही चुनाव कराया जाएगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण ही सबसे बड़ा रोड़ा- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी बाधा ओबीसी आरक्षण है।आयोग गठन, सर्वे, रिपोर्ट और फिर आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में करीब 4 से 6 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है। ऐसे में अप्रैल-जून 2026 के भीतर चुनाव कराना प्रशासनिक रूप से बेहद कठिन माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों की तैयारी, लेकिन तारीख पर संशय-पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर सार्वजनिक रूप से यह दावा करते रहे हैं कि पंचायत चुनाव समय पर ही होंगे। मगर विभागीय स्तर पर तैयारियों की गति और हाईकोर्ट में सरकार के बयान ने चुनाव समय पर होने को लेकर संदेह बढ़ा दिया है। राजनीतिक दलों की रणनीति भी पंचायत चुनाव को लेकर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कई दल मान रहे हैं कि पंचायत चुनाव में देरी की स्थिति में उनकी ऊर्जा और संसाधन 2027 विधानसभा चुनाव की ओर शिफ्ट हो जाएंगे।
2027 के बाद पंचायत चुनाव की अटकलें क्यों?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पंचायत चुनाव 2026 में नहीं कराए गए तो इसके बाद शासन, प्रशासन, राज्य निर्वाचन आयोग और राजनीतिक दलों की प्राथमिकता 2027 विधानसभा चुनाव बन जाएगी। ऐसी स्थिति में पंचायत चुनाव कराना कठिन होगा, क्योंकि प्रशासनिक मशीनरी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त रहेगी राजनीतिक दल पंचायत चुनाव को कम प्राथमिकता देंगे कानून-व्यवस्था और चुनाव प्रबंधन की चुनौती बढ़ जाएगी इसी कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है कि पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं।

रिसीवर की नियुक्ति की तैयारी- सूत्रों के मुताबिक पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शासन स्तर पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों में रिसीवर/प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं। इनके माध्यम से पंचायतों के वित्तीय और प्रशासनिक कार्य संचालित होंगे, जब तक चुनाव कराकर नई निर्वाचित इकाइयाँ नहीं बन जातीं।
समय पर चुनाव के लिए कोर्ट की राह खुली- राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व अधिकारियों और जानकारों के अनुसार, पंचायत चुनाव में थोड़ी बहुत देरी संभव है, लेकिन लंबे समय तक चुनाव टालना आसान नहीं होगा। यदि चुनाव ज्यादा समय तक नहीं कराए गए तो कोई भी पक्ष हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है। ऐसे में सरकार को अदालत में यह बताना होगा कि चुनाव टालने के पीछे ठोस कारण क्या हैं। यदि अदालत सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं होती, तो चुनाव कराने के आदेश भी दिए जा सकते हैं।
कुल मिला कर- उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 अब पूरी तरह ओबीसी आरक्षण आयोग गठन और उससे जुड़े कानूनी-प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर हो गया है। हालांकि सरकार और मंत्री स्तर पर चुनाव समय पर कराने की बातें कही जा रही हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति यह संकेत दे रही है कि चुनाव निर्धारित समय पर कराना कठिन होगा। अब सभी की नजरें इस पर हैं कि सरकार आयोग का गठन कितनी जल्दी करती है और राज्य निर्वाचन आयोग चुनावी कार्यक्रम कब जारी करता है।




