ब्राह्मण विधायकों का सहभोज के नाम पर राजनीतिक हुंकार, निशाने पर रही योगी सरकार!

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ब्राह्मण विधायक जनवरी में फिर करेंगे बैठक……

लखनऊ। यूपी विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के बीच ब्राह्मण विधायकों की एक अहम जुटान सामने आई है। सत्र के तीसरे दिन मंगलवार शाम को कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक (पंचानंद पाठक) की पत्नी के जन्मदिन के अवसर पर उनके लखनऊ स्थित आवास पर ब्राह्मण विधायकों का सहभोज आयोजित किया गया। इस बैठक में पूर्वांचल और बुंदेलखंड से करीब 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए।

बैठक में लिट्टी-चोखा और मंगलवार व्रत का फलाहार परोसा गया। कार्यक्रम में देवरिया से भाजपा विधायक व पूर्व सीएम योगी के मीडिया सलाहकार डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी भी मौजूद रहे। मिर्जापुर विधायक रत्नाकर मिश्रा और एमएलसी उमेश द्विवेदी की आयोजन में प्रमुख भूमिका बताई जा रही है। खास बात यह रही कि इसमें भाजपा के साथ-साथ अन्य दलों के ब्राह्मण विधायक भी शामिल हुए।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ब्राह्मण समाज की राजनीतिक स्थिति और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर गंभीर चर्चा हुई। विधायकों ने कहा कि जातिगत राजनीति में कई समुदाय प्रभावशाली हो गए हैं, जबकि ब्राह्मण समाज की आवाज कमजोर पड़ती जा रही है। उनका आरोप है कि न तो संगठन में समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल रहा है और न ही सरकार में प्रभावशाली भूमिका।

बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि सरकार में ब्राह्मण समाज से डिप्टी सीएम होने के बावजूद उन्हें अपेक्षित अधिकार और प्रभाव नहीं मिल पा रहा है। विधायकों ने इस जुटान को ‘सहभोज’ का नाम दिया। उल्लेखनीय है कि वर्तमान यूपी विधानसभा में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिनमें से 46 भाजपा से हैं। इससे पहले मानसून सत्र के दौरान ठाकुर समाज के विधायकों ने ‘कुटुंब परिवार’ के नाम से बैठक कर अपनी ताकत दिखाई थी। ऐसे में ब्राह्मण विधायकों की यह बैठक भाजपा और योगी सरकार के लिए नई राजनीतिक चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

बैठक में- एमएलसी साकेत मिश्रा, नौतनवां विधायक ऋषि त्रिपाठी, तरबगंज विधायक प्रेमनारायण पांडेय, बांदा विधायक प्रकाश द्विवेदी, बदलापुर विधायक रमेश मिश्रा, खलीलाबाद विधायक अंकुर राज तिवारी, मेहनौन विधायक विनय द्विवेदी समेत कई विधायक और एमएलसी मौजूद रहे।विधायकों ने आरोप लगाया कि आरएसएस, भाजपा संगठन और सरकार में ब्राह्मण समाज की सुनवाई नहीं हो रही है। संगठन में कोई बड़ा पदाधिकारी नहीं है, जिसके जरिए समाज अपनी बात मजबूती से रख सके। उनका कहना है कि भाजपा का परंपरागत समर्थक होने के बावजूद ब्राह्मण समाज को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

जनवरी में फिर होगी बैठक-

बैठक में निर्णय लिया गया कि जनवरी में एक और बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें समाज के राजनीतिक और सामाजिक हितों को लेकर ठोस रणनीति तय की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मण समाज में भाजपा को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। इटावा कथावाचक प्रकरण के बाद यह नाराजगी और मुखर हुई है। बैठक में यह भी तय किया गया कि आगे चलकर आर्थिक सहायता, गरीबों के लिए फंड बैंक, राजनीतिक हिस्सेदारी और समाज से एक बड़े चेहरे को सामने लाने जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा।ब्राह्मण विधायकों की यह एकजुटता आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।

ZFM Times
Author: ZFM Times

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