राष्ट्र निर्माण हेतु हम शिक्षकों को कुछ अलग करना होगा…प्रो. संजीव कुमार

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रील देखने की कुप्रवृत्ति एवं पारिवारिक उम्मीदो के बोझ तले बच्चे डिप्रेशन के शिकार….

आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ परिसर के शैक्षणिक भवन एक के सेमिनार हाल में शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 संजीव कुमार की अध्यक्षता में एक वृहद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें पूर्व राष्ट्रपति एवं प्रसिद्ध दार्शनिक डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में एक वृहद गोष्ठी आयोजित की गई , इसमें विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापकों ने पूरे जोशो-खरोश से सहभाग किया।

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार सिंह ने बताया कि यह सर्व विदित है कि प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। चूकि कल सार्वजनिक अवकाश होने के कारण शिक्षकों की विशेष मांग पर कुलपति प्रो0 संजीव कुमार ने शिक्षक दिवस आज मनाने की अनुमति प्रदान कर दी । आज के इस सारस्वत कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार ने किया, यह सौभाग्य का विषय है कि हमारे प्रदेश की प्रथम नागरिक एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल कुशल शिक्षिका रही है । यानी विश्वविद्यालय के शीर्ष पर बैठे दोनों पदाधिकारी शिक्षक का दायित्व निभा चुके हैं। अपने उद्बोधन में कुलपति ने कहा कि आज के शिक्षकों को नई शिक्षा नीति 2020 के हिसाब से पठन-पाठन का दायित्व निभाना है। हालांकि ऑनलाइन ऑफलाइन में सामंजस्य भी बैठाना है तथा नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ना है ,उसकी महत्ता का बखान करते हुए बड़े-बड़े ऋषि मुनियों तपस्वियों एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों के के बारे में भी अवगत कराना है। इसलिए आज आप सभी शिक्षकों को दो मोर्चे पर छात्रों को जागरूक करना होगा । उन्होंने उद्बोधन की शुरुआत गुरु और शिक्षक से की।

कुलपति जी ने स्पष्ट कहा कि गुरु दीक्षित करता है, और शिक्षक शिक्षा देता है ।हालांकि अब यह दोनों दायित्व प्रोफेसर के रूप में आपको निभाना है यानी शिक्षा और दीक्षा दोनों देनी है । कुलपति ने वर्तमान समय में पैसे की अंधी दौड़ में शिक्षा का बाजारीकरण करने के लिए चेताया भी, उन्होंने कहा की नई पीढ़ी को कुछ संस्थाएं सिर्फ सलेक्शन तक सीमित रख रही है। उन्हें संस्कार बिल्कुल नहीं सिखाया जा रहा है जो काफी घातक होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पठन-पाठन एवं संस्कार छात्रों के अंदर पैदा करनी होगी कि वह पढ़ लिखकर न सिर्फ अपने परिवार, क्षेत्र, जिला, प्रदेश ,बल्कि राष्ट्र के साथ-साथ विश्व का कल्याण करेंगे। गुरु वही है जो अपने बच्चों को पठन-पाठन के भाव से संतुष्ट कर दे, और स्वयं संतुष्ट होकर आह्लादित महसूस करें। वर्तमान में बच्चे डिप्रेशन में इसलिए आ रहे हैं कि कोचिंग का दबाव समाज और परिवार की अपेक्षाएं उन्हें भटकाव के लिए मजबूर कर रही है ,कल गोरखपुर की घटना का उल्लेख करते हुए कुलपति जी ने कहा कि हमें सजग हो जाना है। अन्यथा पहाड़ जैसी समस्या खड़ी हो जाएगी। बच्चे जिस क्षेत्र में जो पढ़ना लिखना चाहते हैं जो बनना चाहते हैं गार्जियन बनने दे, उनके मन के विपरीत जाकर उनकी प्रतिभा को मारने की कदापि की कोशिश ना करें। बच्चों को शिक्षक यह जरूर बताएं कि सिर्फ मार्कशीट तक अपना जीवन सीमित न रखें कम से कम एक अतिरिक्त हुनर भी जनरेट करें। उन्होंने शिक्षकों से भी अनुरोध किया की कुछ-कुछ नया करने की रोज सोच पैदा करें ,हर व्यक्ति के अंदर ऊर्जा है ,इसका इस्तेमाल करें, विपरीत परिस्थितियों से सामंजस बैठाकर जो आगे बढ़ता है वही सच्चा बाजीगर कहलाता है। आप गुरु की भूमिका निभाकर बच्चों को बेहतर से बेहतर देने की कोशिश करें। आत्मिक संतुष्टि मिलेगी मन प्रसन्न रहेगा । मुझे लगता है कि जब से शिक्षक के हाथ से डंडा छीन लिया गया और उनके ऊपर शासन प्रशासन का दबाव आ गया, तब से बच्चों में डर खत्म हो गया जो कदापि उचित नहीं है। शिक्षक यह भी ध्यान रखें की पठन-पाठन की अतिरिक्त सामाजिक व्यावहारिक एवं कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान भी अवश्य दे, जिससे आने वाली पीढ़ी व्यापक दौड़ में पीछे ना रह जाए शिक्षक यदि यह ठान ले कि हम रोजाना समय से क्लास लेंगे तो निश्चित तौर से उस शिक्षक की बच्चे इज्जत करते हैं। आप इसे आजमा कर देखें आत्मिक संतुष्टि मिलेगी। राष्ट्र के निर्माण हेतु हम शिक्षकों को कुछ अलग हटकर करना होगा, अन्यथा आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी । अंत में उन्होंने सभी को शिक्षक दिवस की अग्रिम बधाई देते हुए सभी के मंगल की कामना की । आयोजन समिति को इतने शॉर्ट नोटिस पर आयोजन करने के लिए बधाई दी।

कार्यक्रम का आगाज डॉ. रेनू तिवारी जी के गुरु महिमा के गायन से शुरू होकर डॉ. शुभम राय एवं परमानंद जी के संबोधन से शुरू हुआ ।परिसर की बेटियां कुलपति जी के हाथों केक कटवाकर शिक्षक दिवस की ढेर सारी बधाइयो से नवाजा। उन्होंने सभी गुरुओं के स्वस्थ रहने की कामना की । कार्यक्रम में अन्य लोगों के अलावा डॉ. जयप्रकाश, डॉ. सूर्यकुमार अग्रहरि, डॉ. शुभम, डॉ. प्रियंका, डॉ.हिमांशु ,डॉ .निधि ,डॉ. वंदना आदि भारी संख्या में शिक्षकों एवं कुलपति जी के निजी सचिव भूपेंद्र पांडे व विपिन शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरे कार्यक्रम का संचालन प्राध्यापिका डॉ. वैशाली ने किया।

ZFM Times
Author: ZFM Times

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