न पं फूलपुर में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत स्वीकृति पोखर के सुंदरीकरण के कार्य को रोका…..
आजमगढ़। फूलपुर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 6 चंद्रशेखर आजाद नगर स्थित गाटा संख्या 677 मि. की पोखरी (नन्दोइया पोखरी) के सफाई व सुंदरीकरण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर पंचायत द्वारा कराए जा रहे कार्य को कुछ लोगों ने अपना मलकाना हक बताते हुए रुकवा दिया, जिसके बाद मामला स्थानीय प्रशासन तक पहुंच गया है।

जानकारी के अनुसार कुछ लोगों का कहना है कि वे केवट जाति से हैं और उनका पुश्तैनी पेशा मत्स्य पालन है। उनका दावा है कि जमींदारी उन्मूलन से पहले यह क्षेत्र टाउन एरिया था और गाटा संख्या 677 की पोखरी पर उनके पूर्वजों को जमींदार कमर हुसैन और वाजिद अली के वारिसों से 20 नवंबर 1957 को मत्स्य पालन के लिए पंजीकृत पट्टा मिला था। इसके अलावा 25 नवंबर 1957 को तहसीलदार फूलपुर की अदालत से सुलहनामा भी प्राप्त हुआ था।

दावा करने वालों के अनुसार इस मामले में स्वत्व विवाद को लेकर न्यायालय में मुकदमा भी चला था, जिसका निस्तारण 12 फरवरी 2007 को हुआ। उस निर्णय में पोखरी पर झपसी और भिखारी केवट को काबिज भूमिधर माना गया तथा भूमि उनके नाम दर्ज बताई गई। आरोप है कि मौजूदा नगर पंचायत चेयरमैन द्वारा पोखरी में मिट्टी पाटने का कार्य शुरू कराया गया, जिसे तत्काल हस्तक्षेप कर रुकवाया गया। इस संबंध में हजारी पुत्र श्रीराम, राजाराम पुत्र पूर्णमासी और रामकेश पुत्र नंदलाल ने स्थानीय अधिकारियों सहित मुख्यमंत्री से शिकायत की है।

वहीं दूसरी ओर जमींदार पक्ष ने भी पोखरी पर अपना पुश्तैनी स्वामित्व बताते हुए सुंदरीकरण कार्य पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह पोखरा और उससे जुड़ी जमीन वाजिद अली, चिराग अली, कमर हुसैन आदि के वंशजों की निजी संपत्ति है। उनका आरोप है कि उनके पूर्वजों ने केवट समाज के कुछ लोगों को रहने के लिए जमीन दी थी और मत्स्य पालन की अनुमति भी दी थी, लेकिन पिछले 35–40 वर्षों से वहां मछली पालन नहीं हो रहा है और कुछ लोग अतिक्रमण कर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।

इधर नगर पंचायत अध्यक्ष राम अशिष बरनवाल का कहना है कि नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में वार्ड नंबर 6 की सभासद गुड़िया देवी ने पोखरी के सुंदरीकरण का प्रस्ताव रखा था, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत स्वीकृति मिली है। उन्होंने बताया कि बाबा परमहंस मंदिर के पास स्थित यह ऐतिहासिक पोखरा गंदगी और अतिक्रमण से प्रभावित है, जिससे नगरवासियों को परेशानी हो रही है।
चेयरमैन के अनुसार पोखरी की सफाई और सुंदरीकरण से अतिक्रमण हटेगा, जल स्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी और क्षेत्र को गंदगी से राहत मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अराजक तत्व कब्जे की नीयत से कार्य में बाधा डाल रहे हैं। नगर पंचायत ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत सुंदरीकरण कार्य हर हाल में पूरा कराया जाएगा और अवरोध पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।






