स्वामी विवेकानंद की जयंती पर विचार गोष्ठी, युवाओं से आदर्शों पर चलने का आह्वान

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माहुल, फूलपुर में जयंती पर याद किए गए स्वामी विवेकानंद……..

माहुल(आजमगढ़)। फूलपुर तहसील क्षेत्र के अतरडीहा गांव में स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई गयी। इस दौरान उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस दिन का महत्व स्वामी विवेकानन्द जी के विचार और कार्यों को युवाओं के बीच पहुंचाना होता है। जिससे देश के विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा युवा पीढ़ी आगे आकर अपना योगदान दें और देश को नई ऊचाइंयों पर लेकर जाएं। भाजपा नेता सुजीत जायसवाल ने कहा कि इसकी शुरुआत 1985 से हुई थी। इस दिन को सेलिब्रेट किये जाने का मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद की विचारों, मूल्यों और आदर्शों को बढ़ावा देना है। इस दिन को भारत सरकार की ओर से वर्ष 1984 में मान्यता दी गई थी। इसके बाद 1985 से प्रतिवर्ष स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप मनाया जा रहा है। इस मौके पर महेंद्र प्रजापति, दिपक राजभर, शिवम शर्मा, संतोष सोनी, लालू मोदनवाल, रमेश राजभर आदि रहे।।

इसी कड़ी में युवा दिवस के अवसर पर युवा संन्यासी स्वामी विवेकानंद की जयंती पर फूलपुर में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सुरेश कुमार गुप्त, अनिल कुमार गुप्त, कमल जायसवाल एवं अरविंद कुमार ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, व्यक्तित्व और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि 12 जनवरी 1863 को मकर संक्रांति के दिन कोलकाता में श्री विश्वनाथ दत्त के घर माता भुवनेश्वरी देवी के गर्भ से नरेंद्रनाथ दत्त का जन्म हुआ। बचपन से ही वे कुशाग्र बुद्धि, नटखट स्वभाव, उदार, दयालु और संगीत में गहरी रुचि रखने वाले थे। उनके आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस थे, जिनके मार्गदर्शन में नरेंद्रनाथ ने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया और आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के नाम से विश्वविख्यात हुए। गोष्ठी में बताया गया कि शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी और प्रभावशाली वक्तव्य ने भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान-विज्ञान की महानता को विश्व पटल पर स्थापित किया। उनके विचारों से प्रेरित होकर अनेक लोगों ने लोक कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। सेवा और मानव कल्याण के उद्देश्य से उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो आज भी समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। वक्ताओं ने भगिनी निवेदिता का भी उल्लेख किया, जिन्होंने स्वामी विवेकानंद से प्रेरित होकर अपना संपूर्ण जीवन भारत में रहकर लोक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश — “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” — को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया। अंत में कहा गया कि स्वामी विवेकानंद की जयंती आज युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। उनके जीवन आदर्शों पर चलकर युवा अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। विचार गोष्ठी में उनके जीवन चरित्र पर चर्चा करते हुए उन्हें शब्द श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

ZFM Times
Author: ZFM Times

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