पेड़ लगाओ ओजोन परत बचाओ,...पद्म श्री उमाशंकर पांडे
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ परिसर के न्यू फैसिलिटी सेंटर में भूगोल विभाग के द्वारा बृहद सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य विषय था भारतीय ज्ञान प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जल प्रहरी के रूप से विख्यात पद्मश्री उमाशंकर पांडे जी थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने किया।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार सिंह ने बताया कि इस सारस्वत कार्यक्रम की शुरुआत सम्मानित मंच द्वारा सर्वप्रथम ज्ञान की देवी मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित किया गया। विश्वविद्यालय की बिटिया सरस्वती वंदना कर माहौल को संगीतमय बना दिया। अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि सबसे पहले तो आयोजन समिति के सभी सदस्यों विशेष तौर से भूगोल विभाग के प्राध्यापकगणो को हृदय से बधाई। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय समस्याएं हमारे अस्तित्व के लिए गहन खतरा बनी हुई है इसका समाधान और जागरूकता के लिए सभी का योगदान आवश्यक है। छोटे-छोटे कदम जैसे की ऊर्जा की बचत, पानी का बचाव और चक्रीकरण ,पर्यावरण की दिशा में बड़े बदलाव ला सकते हैं। हम सभी की जिम्मेदारी है कि इस धरती को संरक्षित करें और अगली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ वातावरण छोड़े, सभी को एकजुट होकर पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करना चाहिए ।हमें यह समझना होगा कि पर्यावरण की रक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए हमें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की जरूरत है।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी एवं पद्मश्री जिन्हें आमजन जलयोद्धा के रूप में जानते और समझते हैं, ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब समाज में पर्यावरणीय जागरूकता हो ।जागरूकता का अर्थ ही होता है लोगों को समस्याओं के प्रति सचेत करना और उन्हें समाधान करने के तरीकों से अवगत कराना, स्कूलो, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय में पर्यावरण शिक्षा को अनिवार्य करना चाहिए।ताकि बच्चों और युवाओं को इस महत्वपूर्ण विषय की जानकारी हो सके ,सार्वजनिक स्थान, मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जन जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। उन्होंने जागरूकता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर समाधानों में समाज के सभी समुदायों को शामिल करना चाहिए। वृक्षारोपण और वनों की पुनर्स्थापना पर्यावरणीय सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाने चाहिए और वनों की कटाई पर कठोरता से रोक लगाई जानी चाहिए। पर्यावरणीय समस्याओं में वायु प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की जो विभिन्न प्रकार के रसायनों और कणो के वातावरण में फैलने से के कारण होती है प्रमुख कारणो में वाहनों का धुआं उद्योगों से निकलने वाला धुआ, घरेलू जलने वाले ईंधन और विभिन्न प्रकार के रसायन शामिल है । जल प्रदूषण की समस्या औद्योगिक अपशिष्ट कृषि रसायन घरेलू अपशिष्ट और तेल फैलाव के परिणाम स्वरूप इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है। यह मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता दोनों के लिए हानिकारक है। मिट्टी ,क्षण भूमि की उर्वरता में कमी का परिणाम है। महामना मदन मोहन मालवीय की धरती से पधारे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार ने पर्यावरण के प्रति समाज की चिंता में अपने को शामिल करते हुए कहा कि यह बहुत पीड़ा का विषय है कि आज भी हम सभी पर्यावरण के प्रति उदासीन है। जो निश्चित ही पीड़ा का विषय है ।अपने सारगर्भित संबोधन में उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि इंसान और पर्यावरण के बीच हमेशा से एक गहरा रिश्ता रहा है। प्रकृति के साथ इंसान अठखेलिया खेलता हैं ।आपस में एक दूसरे का ऐसा सामंजस्य है कि दोनों एक दूसरे के बगैर अधूरे हैं।प्राकृतिक आपदाएं जो वर्तमान में हो रही है, कहीं बादल फट रहे हैं तो कहीं नदियां उफान पर हैं यह निश्चित निश्चित रूप से हम सभी के लिए विचारणीय विषय है। यदि इस पर हम नहीं चेते तो आने वाला कल काफी दर्दनाक और पीड़ा दायक होगा। पड़ोसी देश नेपाल से पधारे त्रिभुवन विश्वविद्यालय के डॉ. शिवकांत दुबे में कहा कि आज समूचा विश्व इस वेदना से ग्रस्त है कि स्वच्छ हवा कहां मिलेगी। लोग स्वच्छ हवा प्राप्त करने के लिए पहाड़ों की वादियो में जाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अभी हाल की घटनाएं जैसे बादल फटना, भूस्खलन होना एक चिंता का विषय बना हुआ है। अब आमजन यह परेशान है कि जाए तो जाएं कहां। हर जगह भय का वातावरण है। इसलिए कल से नहीं, आज से, आज से नहीं अभी से, हमें पर्यावरण के प्रति सचेत होना होगा। तीर्थराज प्रयाग की धरती से पधारे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. नितिन कुमार मिश्र ने पर्यावरण को लेकर सरकार की चिताओं से अपने को जोड़ते हुए यह स्वीकार किया कि धीरे-धीरे ही सही समाज का एक तबका पर्यावरण के प्रति चिंतित हो रहा है। यह निश्चय ही सुकून का विषय है। टू व्हीलर और फोर व्हीलर गाड़ियां विद्युत करंट से चार्ज होकर सड़कों पर दौड़ने लगी है, जिसका निश्चय ही पर्यावरण के लिए लाभ होगा ।विद्युत ट्रेन ,विद्युत बस ,सरकार की चिंता का ही एक अंग है। सबसे बड़ी पीड़ा यह है की फोर लेन और सिक्स लेन के चक्कर में हम पर्यावरण से भरपूर खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके बारे में हमें विचार करना ही होगा।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. शशि प्रकाश शुक्ल एवं सहसंयोजक डॉ. नसीम आयोजन सचिव डॉ. महीप एवं सौरभ ने आए हुए आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी के आगमन को प्रणाम किया तथा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आयोजन में सहयोग करने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया । अन्य लोगों के अतिरिक्त डॉ. सुधीर कुमार , डॉ. वीरेंद्र , डॉ. बृजेश , डॉ.अग्रहरि, डॉ. शुभम और डॉ. नितेश, डॉ. विजय प्रकाश एवं भारी संख्या में विश्वविद्यालय परिसर की छात्र-छात्राएं तथा गैर शिक्षक कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ. वैशाली एवं डॉ. दीक्षा ने समेकित रूप से किया।




