पंचायत चुनाव की तैयारी में अब विलंब की संभावना जताई जा रही है….
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टल सकते हैं। दरअसल, नगर विकास विभाग ने राज्य में 97 नए नगरीय निकायों के गठन और 107 नगरीय निकायों की सीमा विस्तार का प्रस्ताव भेजा है। इसे लेकर पंचायतीराज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर मार्गदर्शन माँगा है। इस प्रक्रिया के चलते पंचायत चुनावों में देरी की संभावना जताई जा रही है। मालूम हो की
उत्तर प्रदेश में आगामी त्री ‑स्तरीय पंचायत चुनाव (जिला, ब्लॉक, ग्राम) की तैयारी जोरों पर है, लेकिन इन त्यारियों के बीच शहरी क्षेत्र के पुनर्गठन को लेकर चल रही प्रक्रिया चुनाव को प्रभावित कर सकती है,
उत्तर प्रदेश नगर विकास विभाग ने 97 नए नगरीय निकायों (नगर पंचायतें/परिषद/निगम) की स्थापना और 107 मौजूदा निकायों के सीमा विस्तार का प्रस्ताव भेजा है, इन निकायों के विस्तार की अधिसूचना आने की उम्मीद जून से जुलाई के बीच की जा रही थी और कहीं ना कहीं यह जहां शहरी अर्ध शहरी क्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र के विकास व स्थानीय राजनीति को प्रभावित करेगा वही जन सुविधाओं को लेकर भी लोगों को खासी उम्मीदें होती हैं,
इन सभी नगरी निकायों के संबंधित ग्रामीण क्षेत्र की जनता व नगरीय निकाय से निर्वाचित अध्यक्ष, पार्षद, सभासद शहरी सीमा विस्तार को लेकर विकास का प्लान बना ही रहे थे कि त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव की घोषणा ने शहरी सीमा विस्तार को ठंडा बस्ती में डाल दिया था, लेकिन किन्हीं कारणों से मई 21 के आदेश के तहत नए नगर निकायों और सीमा विस्तार पर पहले से रोक लगी थी, फस रहे पेंच के चलते यह उम्मीद एक बार पुनः जागृत हो गई है, अगर शहरी सीमा विस्तार हुआ तो इससे राज्य की शहरी आबादी लगभग 22 % से बढ़कर 35 % तक पहुँचने का अनुमान है ।

अब नगर विकास विभाग ने पंचायती राज विभाग से इस फ़्रीज को हटाने की मांग की है, जिससे प्रस्तावों पर पुनः कार्य शुरू हो सके, वहीं पंचायती राज विभाग ने इन प्रस्तावों के मद्देनज़र राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) को मार्गदर्शन हेतु पत्र भेजा है। SEC से यह पूछा गया है कि नई नगर संरचनाएँ और सीमा विस्तार लागू होने की स्थिति में पंचायत चुनाव कब और किस तरह आयोजित होंगे, इस संबंध में प्रमुख सूत्रों की माने तो पंचायत चुनाव की तैयारी में अब विलंब की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि नए निकायों के विभाजन (delimitation) और मतदान क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण आवश्यक हो सकता है। इससे चुनाव का शिड्यूल प्रभावित हो सकता है।




